Monday, August 15, 2011
Sunday, August 14, 2011
पिंजर बनी सोने की चीड़िया
आजादी के इस पवन अवसर पर सभी हिन्दुस्तानियों को प्रभात का सलाम दोस्तो ये समय सिर्फ जश्न का नहीं है। ये हमारे आत्ममंथन का भी समय है की हमने अपने उन महान देशभक्तों की समाधी पर सिर्फ फूल चढाएं है या उनके सपनों को भी हकीकत के पंख दिए हैं या नहीं. इतिहास के पन्ने पलटतें हैं तो विश्वास नहीं होता कि हम उस भारतवर्ष के नागरिक हैं जो कभी सोने की चीड़िया था।
आज जो मंजर हमारे सामने है, उसे देखकर कौन कह सकता है कभी यह पिंजर सोने की चीड़िया रहा होगा। हर तरफ फैला भ्रष्टाचार, भूख और लाचारी से तड़पते लोग, रोजगार की राह देखती करोड़ों आंखे, फुटपाथ पर आशियाने का ख्वाब देखते बेघर, हर तरफ मासूमों के शिकार के लिए घात लगाए बैठी भेडियों की फोज, नेताओं और दबंगों की चक्की में पीसते आजाद भारत के गुलाम परिंदे। ये तस्वीर है मेरे आज के भारत की।
आजादी के छह दसक बाद भी यह तस्वीर क्यों नहीं बदली। कभी-कभी लगता है कि अच्छी थी वो गुलामी, कम से कम अपनों से लुटने का मलाल तो नहीं होता। 2जी स्पैक्ट्रम, काॅमनवैल्थ गैम्स, आदर्स सोसाईटी और अनाज घोटाला हाल ही के जख्म है, इतिहास तो और भी भयानक है। ये सब महाघोटाले अंग्रेजों द्वारा की गई लूट से कहीं बढ़कर है। ये समय है की हम कुछ नया करने का प्रण ले और इस देश को फिर से विश्व का सरताज बनायें। तभी हम वास्तविक आजादी के जश्न को मन के काबिल हो पाएँगे।
आज जो मंजर हमारे सामने है, उसे देखकर कौन कह सकता है कभी यह पिंजर सोने की चीड़िया रहा होगा। हर तरफ फैला भ्रष्टाचार, भूख और लाचारी से तड़पते लोग, रोजगार की राह देखती करोड़ों आंखे, फुटपाथ पर आशियाने का ख्वाब देखते बेघर, हर तरफ मासूमों के शिकार के लिए घात लगाए बैठी भेडियों की फोज, नेताओं और दबंगों की चक्की में पीसते आजाद भारत के गुलाम परिंदे। ये तस्वीर है मेरे आज के भारत की।
आजादी के छह दसक बाद भी यह तस्वीर क्यों नहीं बदली। कभी-कभी लगता है कि अच्छी थी वो गुलामी, कम से कम अपनों से लुटने का मलाल तो नहीं होता। 2जी स्पैक्ट्रम, काॅमनवैल्थ गैम्स, आदर्स सोसाईटी और अनाज घोटाला हाल ही के जख्म है, इतिहास तो और भी भयानक है। ये सब महाघोटाले अंग्रेजों द्वारा की गई लूट से कहीं बढ़कर है। ये समय है की हम कुछ नया करने का प्रण ले और इस देश को फिर से विश्व का सरताज बनायें। तभी हम वास्तविक आजादी के जश्न को मन के काबिल हो पाएँगे।
अलविदा फिरंगी कह गया
हजारों शहिदों की कुर्बानी से आजादी हमें मिली
हमारे मुरझाए होठों पर हंसी तब खिली।
हवा ने बहना छोड़ दिया था
फूल भी खिलना भूल गए थे
वो कुछ ऐसा मंजर था
जिसने देखा वो कांप गए थे।
न हवा में ये रवानी थी
न मस्ती में जवानी थी।
हर लब पर था ताला पड़ा
न आवाज में बुलंदी थी
न गीतो में था मधुर रस
अंग्रेजों के जुल्म सहने को
हर हिंदुस्तानी था बेबस।
पर जब चली हवा इंकलाब की
गौरों का साम्राज्य ढ़ह गया
जब उठी लहर देश प्रेम की
अलविदा फिरंगी कह गया ।
सोने की चिड़िया अब आजादी से चहक रही है
उन्नती और विकास की नई कहानी कह रही है।
प्रभात इंदौरा
हमारे मुरझाए होठों पर हंसी तब खिली।
हवा ने बहना छोड़ दिया था
फूल भी खिलना भूल गए थे
वो कुछ ऐसा मंजर था
जिसने देखा वो कांप गए थे।
न हवा में ये रवानी थी
न मस्ती में जवानी थी।
हर लब पर था ताला पड़ा
न आवाज में बुलंदी थी
न गीतो में था मधुर रस
अंग्रेजों के जुल्म सहने को
हर हिंदुस्तानी था बेबस।
पर जब चली हवा इंकलाब की
गौरों का साम्राज्य ढ़ह गया
जब उठी लहर देश प्रेम की
अलविदा फिरंगी कह गया ।
सोने की चिड़िया अब आजादी से चहक रही है
उन्नती और विकास की नई कहानी कह रही है।
प्रभात इंदौरा
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Saturday, August 13, 2011
उडो.. की पंख आजाद है
आसमां की ऊंचाई,सागर की गहराई
अंतरिक्ष का विस्तार,मंजील की लंबाई।
अब कु छ भी असंभव नहीं
दुनिया जिसको मान चुकी
आज फिर दोहराता हूं मैं वही
पैरों की वो बेड़ियां अब बीती बात हुई।
देखकर अपनी उडान,
अब अधूरा ना रहेगा
हम हिंदुस्तानी हैं श्रेष्ठ
अब ये हर कोई कहेगा
इस धरा के स्वर्ग पर
आशियाना है अपना।
वर्षों के आंशु पोंछकर
सीखा है, हमने हंसना
ये हंसी कभी गुम न हो
प्यार अपना कम न हो।
आजादी के जश्न में झुमों
और मिलकर प्रभात संग
यारों तुम सब यही कहो।
आज वक्त है साथ हमारे
उडो की पंख है आजाद तुम्हारे।
....प्रभात इंदौरा
अंतरिक्ष का विस्तार,मंजील की लंबाई।
अब कु छ भी असंभव नहीं
दुनिया जिसको मान चुकी
आज फिर दोहराता हूं मैं वही
पैरों की वो बेड़ियां अब बीती बात हुई।
देखकर अपनी उडान,
दुनिया भी हैरान हुई।
अपनी कोई उम्मीद, कोई सपना
अब अधूरा ना रहेगा
हम हिंदुस्तानी हैं श्रेष्ठ
अब ये हर कोई कहेगा
इस धरा के स्वर्ग पर
आशियाना है अपना।
वर्षों के आंशु पोंछकर
सीखा है, हमने हंसना
ये हंसी कभी गुम न हो
प्यार अपना कम न हो।
आजादी के जश्न में झुमों
और मिलकर प्रभात संग
यारों तुम सब यही कहो।
आज वक्त है साथ हमारे
उडो की पंख है आजाद तुम्हारे।
....प्रभात इंदौरा
Monday, August 8, 2011
Current Affairs of this Week: 06 Aug 2011 to 113 Aug 2011
International :
In Nepal, ban on smoking in public places comes into effect from 7 August 2011.
In Afghanistan, a probe was launched by the International Security Assistance Force, ISAF, to determine the exact cause of the chopper crash which killed 30 American soldiers
Environment & Ecology.The Report brought out by the Wildlife Institute of India and National Tiger Conservation Authority enlisted the major threats faced by the three tiger reserves in Tamil Nadu
India :
Aeronautical engineer N.S. Prabhakar Naidu among the first batch of aeronautical engineers to graduate from the Madras Institute of Technology (MIT) in 1952, passed awayCorporate/Business Current Affairs August 2011. Larsen & Toubro bagged orders worth $889 million in the hydrocarbon sector from the UAE and Thailand
Economy :
Securities and Exchange Board of India issued a show-cause notice to the country's leading stock exchange, National Stock Exchange (NSE).
Cabinet Committee on Economic Affairs approved a special scholarship programme for BPL students in Jammu & Kashmir to improve literacy and financially boost the BPL students
Science & Technology
British scientists developed an implanted sleeve which can cure diabetes. The new device is called the EndoBarrier.
Science & Technology Current Affairs 2011. German Scientists developed a new software which can accurately detect when crowds are starting to build up to dangerous levels.
Sunday, August 7, 2011
बेटी ने पहुंचाया शिखर तक
प्रभात इंदौरा चंडीगढ़
एक तरफ जहां लोग बेटी को बोझ समझकर भ्रूण हत्या जैसे कुकृत्य में लिप्त हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपनी सफलता और कामयाबी का सारा क्रेडिट अपनी बेटी को देते हैं। याक्षाी वेडिंग बाजार के ओवनर सतिन्द्र कुमार भी इन्हीें लोगों में से एक है बकौल सतिंद्र वे आज जो कुछ भी है वह सब उनकी बेटी की वजह से है, वे कहते हैं कि वे लोग बहुत नासमझ है जो घर की लक्ष्मी को घर आने से पहले ही परलोक पहुंचा देते हैं।याक्षी वेड्रिग बाजार के नये शो रूम के उदघाटन से पहले सतिन्द्र ने अपनी सफलता के राज दिनभर के साथ सांझा किए।
चंडीगढ़ की खूबसूरती ने किया आकर्षित-
चंडीगढ़ की खूबसूरती के बारे में बहुत कुछ सुना था इसलिए 23 साल पहले मैं अपने शहर करनाल को छोड़कर यहां आया। जब मैं अपने सपनों के इस शहर में आया तो मैं 2 साल का था।यहां के खुले वातारण माहौल और लोगों की जिंदादिली को देखकर कुछ ऐसा करने की इच्छा प्रबलित हुई जिससे मैं यहां के लोगों के सपनों को हकिकत में बदल सकूं।
करियर-
करनाल में मेरे बडे भाई की मनियारी की दुकान थी वे होलसेल का काम किया करते थे। भाई के इस काम से मेरे मन में भी यहीे काम करने का विचार आया इसी के चलते मैंने लगभग 16 वर्षो तक चंडीगढ़ में प्रिति फैशन के साथ काम किया। 1993 में मेरी शादी हो गई।2010 में मैंने सेक्टर 7 स्थित याक्षी वेडिंग बाजार की पार्टनरशिप के साथ सुरूआत की। इस शो रूम का नाम मैंने अपनी छोटी बेटी याक्षी के नाम पर रखा। मैंने राजन वाॅच कंपनी और एक अन्य को फ्रेंचाइजी भी दी।
ट्राइसिटी के सहयोग ने दिया हौसला-
ट्राइसिटी के जिंदादिल लोगों ने मेरे काम की बहुत सराहना की लोगों के प्यार और उनसे मिली सरहना के कारण ही मुझे और मेरे काम को विशेष पहचान मिली। एक समय था जब राजा महाराजा और रानियों की पोशाके हमें आकर्षि करती थी।हर कोई उन जैसे शाही लिबास पाने की कामना करता थ। परंतु इतने महंगे कपड़़़़़़़़़़ेे पहनना हर किसी के बस की बात नहीं होता। जकिन मैं तो लोगों के इसी सपने को साकार करना चाहता था कि महंगे से महंगा लिबास भी हर किसी के पहुंच में हो। और हम खुश हैंे कि हम लोगों को वो सब दे पा रहे हैंे जो कभी सिर्फ उनका सपना था। याक्षी वेडिंग बाजार में हर प्रकार के लिबास रेंट पर उपलब्ध है जिससे लोग कम पैसे शाही लिबास पहनने के आनंद को अनुभव कर सकते हैं।
खास है याक्षी वेडिंग बाजार-
लोगों के सपनों को हकिकत का में बदल रहा हमारा शो रूम अपने आप में बहुत खास है। याक्षी वेडिंग बाजार ही एकमात्र स्थान है जहां से आप किराये पर बिल्कुल नयी पोशाक प्राप्त कर सकते हैं। यहां एक ही छत के नीचे आप अपने मन की कई अन्य वस्तुएं भी खरीद सकते हैं। यहां से खरीददारी करना सपनों को सच करने के समान है। यह शो रूम अपनी तरह का एक विशिष्ट शोरूम है।
8 अगस्त से शो रूम की नयी शाखा की शुरूआत चंडीगढ़ सेक्टर 17डी में हो रही है। इसका नाम भरी मैंने अपनी बेटी याक्षी के नाम पर ही रखा है। खास बात ये है कि इसमें मेरा कोई अन्य हिस्सेदसा नहीं हैं।
पाठकों को संदेश-
मैं पाठकांे से यही कहना चाहूंगा की सपने देखना अच्छा है लेकिन हमें उन्हे पूरा करने के लिए भी दिल से प्रयास करना चाहिए। हमारी समस्या है कि हम सपने तो बडे बडे देखते हैं परंतु उन्हें पूरा करने के लिए कोई विशेष मेहनत नहीं करते और यहीं पर हम मात खा जाते है और हमारे सपने सिर्फ सपने बनकर रह जाते हैं। एक और बात जो मैं विशेष तौर पर कहना चाहुंगा कि कन्या कभी बोझ नहीं होती वे तो हमारा सहारा होती है और घर की लक्ष्मी इसलिए हमें कभी भी कन्या भ्रूण हत्या जैसा कुकृत्य नहीं करना चाहिए और समाज की इस मानसिकता को बदलने के लिए प्रयास करने चाहिए ताकि बेटी को भी जीने का हक मिल सके।
एक तरफ जहां लोग बेटी को बोझ समझकर भ्रूण हत्या जैसे कुकृत्य में लिप्त हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपनी सफलता और कामयाबी का सारा क्रेडिट अपनी बेटी को देते हैं। याक्षाी वेडिंग बाजार के ओवनर सतिन्द्र कुमार भी इन्हीें लोगों में से एक है बकौल सतिंद्र वे आज जो कुछ भी है वह सब उनकी बेटी की वजह से है, वे कहते हैं कि वे लोग बहुत नासमझ है जो घर की लक्ष्मी को घर आने से पहले ही परलोक पहुंचा देते हैं।याक्षी वेड्रिग बाजार के नये शो रूम के उदघाटन से पहले सतिन्द्र ने अपनी सफलता के राज दिनभर के साथ सांझा किए।
चंडीगढ़ की खूबसूरती ने किया आकर्षित-
चंडीगढ़ की खूबसूरती के बारे में बहुत कुछ सुना था इसलिए 23 साल पहले मैं अपने शहर करनाल को छोड़कर यहां आया। जब मैं अपने सपनों के इस शहर में आया तो मैं 2 साल का था।यहां के खुले वातारण माहौल और लोगों की जिंदादिली को देखकर कुछ ऐसा करने की इच्छा प्रबलित हुई जिससे मैं यहां के लोगों के सपनों को हकिकत में बदल सकूं।
करियर-
करनाल में मेरे बडे भाई की मनियारी की दुकान थी वे होलसेल का काम किया करते थे। भाई के इस काम से मेरे मन में भी यहीे काम करने का विचार आया इसी के चलते मैंने लगभग 16 वर्षो तक चंडीगढ़ में प्रिति फैशन के साथ काम किया। 1993 में मेरी शादी हो गई।2010 में मैंने सेक्टर 7 स्थित याक्षी वेडिंग बाजार की पार्टनरशिप के साथ सुरूआत की। इस शो रूम का नाम मैंने अपनी छोटी बेटी याक्षी के नाम पर रखा। मैंने राजन वाॅच कंपनी और एक अन्य को फ्रेंचाइजी भी दी।
ट्राइसिटी के सहयोग ने दिया हौसला-
ट्राइसिटी के जिंदादिल लोगों ने मेरे काम की बहुत सराहना की लोगों के प्यार और उनसे मिली सरहना के कारण ही मुझे और मेरे काम को विशेष पहचान मिली। एक समय था जब राजा महाराजा और रानियों की पोशाके हमें आकर्षि करती थी।हर कोई उन जैसे शाही लिबास पाने की कामना करता थ। परंतु इतने महंगे कपड़़़़़़़़़़ेे पहनना हर किसी के बस की बात नहीं होता। जकिन मैं तो लोगों के इसी सपने को साकार करना चाहता था कि महंगे से महंगा लिबास भी हर किसी के पहुंच में हो। और हम खुश हैंे कि हम लोगों को वो सब दे पा रहे हैंे जो कभी सिर्फ उनका सपना था। याक्षी वेडिंग बाजार में हर प्रकार के लिबास रेंट पर उपलब्ध है जिससे लोग कम पैसे शाही लिबास पहनने के आनंद को अनुभव कर सकते हैं।
खास है याक्षी वेडिंग बाजार-
लोगों के सपनों को हकिकत का में बदल रहा हमारा शो रूम अपने आप में बहुत खास है। याक्षी वेडिंग बाजार ही एकमात्र स्थान है जहां से आप किराये पर बिल्कुल नयी पोशाक प्राप्त कर सकते हैं। यहां एक ही छत के नीचे आप अपने मन की कई अन्य वस्तुएं भी खरीद सकते हैं। यहां से खरीददारी करना सपनों को सच करने के समान है। यह शो रूम अपनी तरह का एक विशिष्ट शोरूम है।
8 अगस्त से शो रूम की नयी शाखा की शुरूआत चंडीगढ़ सेक्टर 17डी में हो रही है। इसका नाम भरी मैंने अपनी बेटी याक्षी के नाम पर ही रखा है। खास बात ये है कि इसमें मेरा कोई अन्य हिस्सेदसा नहीं हैं।
पाठकों को संदेश-
मैं पाठकांे से यही कहना चाहूंगा की सपने देखना अच्छा है लेकिन हमें उन्हे पूरा करने के लिए भी दिल से प्रयास करना चाहिए। हमारी समस्या है कि हम सपने तो बडे बडे देखते हैं परंतु उन्हें पूरा करने के लिए कोई विशेष मेहनत नहीं करते और यहीं पर हम मात खा जाते है और हमारे सपने सिर्फ सपने बनकर रह जाते हैं। एक और बात जो मैं विशेष तौर पर कहना चाहुंगा कि कन्या कभी बोझ नहीं होती वे तो हमारा सहारा होती है और घर की लक्ष्मी इसलिए हमें कभी भी कन्या भ्रूण हत्या जैसा कुकृत्य नहीं करना चाहिए और समाज की इस मानसिकता को बदलने के लिए प्रयास करने चाहिए ताकि बेटी को भी जीने का हक मिल सके।
दोस्त
मिल सकता है खुदा भी इबादत से
पर सच्चा दोस्त नहीं मिलता ।
मिले हैं जो चंद दोस्त किस्मत से,
रखना उन्हें हिफाजत से।
हर गम के मरहम हैं वो,
हर खुशी के हिस्सेदार।
उनके संग बिताया हर पल
रखना तुम संजोकर यार।
इस नफरत की दुनिया में,
नहीं मिलेगा ऐसा प्यार।
दोस्त के संग बिताया हर पल
होता है बहुत यादगार।
थाम लेते हैं वो हाथ हमारा
जब भी हो हमारे नजदीक मझदार।
गर कभी रूठ जाए वो
तो प्यार से उसे मनाना।
वो कितना खास है तुम्हारे लिए
उसको यह बताना।
नफरत के अंधियारें में दोस्त है,
सबसे बड़ा सहारा प्रभात।
हर मुश्किल में हर खुशी में
तुम देना उसका साथ।
दोस्त बिन अधूरी है
हर खुशी, हर मस्ती।
दोस्तों से ही है
गुलजार हमारी बस्ती।
ॅफेसबुक हो, ओरकुट हो
या हो गली मोहल्ला।
क्लास रूम की मस्ती हो
या हो कॉलेज का हो-हल्ला
पार्टी की महफिल हो
हो नूरा या सूरा ।
बिन दोस्त के है, ये सब अधूरा
पर सच्चा दोस्त नहीं मिलता ।
मिले हैं जो चंद दोस्त किस्मत से,
रखना उन्हें हिफाजत से।
हर गम के मरहम हैं वो,
हर खुशी के हिस्सेदार।
उनके संग बिताया हर पल
रखना तुम संजोकर यार।
इस नफरत की दुनिया में,
नहीं मिलेगा ऐसा प्यार।
दोस्त के संग बिताया हर पल
होता है बहुत यादगार।
थाम लेते हैं वो हाथ हमारा
जब भी हो हमारे नजदीक मझदार।
गर कभी रूठ जाए वो
तो प्यार से उसे मनाना।
वो कितना खास है तुम्हारे लिए
उसको यह बताना।
नफरत के अंधियारें में दोस्त है,
सबसे बड़ा सहारा प्रभात।
हर मुश्किल में हर खुशी में
तुम देना उसका साथ।
दोस्त बिन अधूरी है
हर खुशी, हर मस्ती।
दोस्तों से ही है
गुलजार हमारी बस्ती।
ॅफेसबुक हो, ओरकुट हो
या हो गली मोहल्ला।
क्लास रूम की मस्ती हो
या हो कॉलेज का हो-हल्ला
पार्टी की महफिल हो
हो नूरा या सूरा ।
बिन दोस्त के है, ये सब अधूरा
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