थाम के जिसने हाथ मेरा, चलना मुझे सिखाया
जीवन के हर रंग से अवगत मुझे कराया ।
जीसने जीवन पथ पर हरपल साथ निभाया
मेरी तुतलाती जुबां को जिसने सबल बनाया ।
जब भी मुश्किल डगर पर मे कदम लडखडाए
उसने अपने मजबूत हाथ, मेरी तरफ बाऐ।
जीसने हर हालात में रखा मेरा ख्याल
हमेशा दिया जवाब मैंने जो भी किया सवाल ।
मेरी हर ख्वाहिश जिसने पूरी की हर हाल में
वो है लहराता हुआ वृक्ष, हूँ उसकी एक डाल मैं ।
जिसका आलिंगन प्यार रा एक पल में मुझे मना ले
मन क कि दुनिया की सारी मुस्कान,मेरे होठों पे सजा दे ।
मैं कितनी भी शरारत करूँ
Saturday, June 18, 2011
Friday, June 17, 2011
ऐसा देश था मेरा
सोने की चीड़िया था कभी जो
था विश्व का सरताज कभी
विश्व गुरू कहलाता था जो
करता था जगत पर राज कभी .
था जो देवों की जन्म कभी
संतों की था जो कर्म भूमि कभी
था जहां प्रेम का वास कभी.
जो धरती पर था स्वर्ग कभी
जहां प्रेम की गंगा बहती थी
हर दिल में अनुराग बसता था कभी.
अब सोने की चीड़िया हुई पिंजर
छिना ताज, सीना हुआ जर्जर.
अपनों ने ही घोंपा है मेरे देश के सीने में खंजर
आजादी के बाद भी है , गुलामी का सा मंजर.
गांधी, सुभाष ,भगत के सपने हुए चूर चूर यहां पर
वो प्रेम और त्याग नजर नहीं आता दूर दूर यहां पर.
धर्म और सत्ता के नाम पर अब होते दंगे रोज यहां पर.
हर काम में भ्रष्टाचार और हर चीज में मिलावट
सच्चाई का मिट चुका निशां,हर रिश्ता महज दिखावट.
अनगिनत मुखोटों में लोग भूले असली पहचान यहां
बस रह गई औपचारिकताएं, था गहरा विश्वास जहां.
कहां से चले थे और पहुंच गए प्रभात कहां
अब तुम भी सोचो बंधु प्यारे क्या थे कभी
और क्या हैं अभी ?
. . . प्रभात इंदौरा
था विश्व का सरताज कभी
विश्व गुरू कहलाता था जो
करता था जगत पर राज कभी .
था जो देवों की जन्म कभी
संतों की था जो कर्म भूमि कभी
था जहां प्रेम का वास कभी.
जो धरती पर था स्वर्ग कभी
जहां प्रेम की गंगा बहती थी
हर दिल में अनुराग बसता था कभी.
अब सोने की चीड़िया हुई पिंजर
छिना ताज, सीना हुआ जर्जर.
अपनों ने ही घोंपा है मेरे देश के सीने में खंजर
आजादी के बाद भी है , गुलामी का सा मंजर.
गांधी, सुभाष ,भगत के सपने हुए चूर चूर यहां पर
वो प्रेम और त्याग नजर नहीं आता दूर दूर यहां पर.
धर्म और सत्ता के नाम पर अब होते दंगे रोज यहां पर.
हर काम में भ्रष्टाचार और हर चीज में मिलावट
सच्चाई का मिट चुका निशां,हर रिश्ता महज दिखावट.
अनगिनत मुखोटों में लोग भूले असली पहचान यहां
बस रह गई औपचारिकताएं, था गहरा विश्वास जहां.
कहां से चले थे और पहुंच गए प्रभात कहां
अब तुम भी सोचो बंधु प्यारे क्या थे कभी
और क्या हैं अभी ?
. . . प्रभात इंदौरा
Thursday, April 7, 2011
भारी समर्थन के बावजूद नहीं मान रही सरकार
प्रभात
नई दिल्ली, 8 अप्रैलः तीन दिनों से अन्ना हजारे की जंग जारी है, उनके आमरण अनशन को पूरे देश में भारी समर्थन मिल रहा है। आम आदमी से लेकर बॉलीवूड तक उनके साथ खड़ा है। परंतु अभी भी सरकार का इस विधेयक के प्रति अड़ियल रुख जारी है। सरकार का कहना है कि वह संयुक्त मसौदा समिति की अध्यक्षता किसी गैर सरकारी व्यक्ति को देने और आधिकारिक अधिसूचना जारी करने की मांग स्वीकार नहीं कर सकती।
मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल व कार्यकर्ताओं स्वामी अग्निवेश और
साथ निर्धारित बैठक आज नहीं हो पाई। क्योंकि दोनों पक्षों ने कहा कि वे इस संबंध में एक दूसरे का इंतजार कर रहे हैं। यह बैठक अब शाम छह बजे होगी। सिब्बल ने कहा कि लोकपाल विधेयक पर संयुक्त मसौदा समिति में सिर्फ सरकारी अधिकारी शामिल होगें और कोई भी मंत्री इसका हिस्सा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त समिति के गठन पर आधिकारिक अधिसूचना की कोई संभावना नहीं है लेकिन हमने उन्हें बताया है कि हम कानून मंत्रालय और प्रेस नोट के जरिये एक आधिकारिक पत्र देना चाहते हैं।
नई दिल्ली, 8 अप्रैलः तीन दिनों से अन्ना हजारे की जंग जारी है, उनके आमरण अनशन को पूरे देश में भारी समर्थन मिल रहा है। आम आदमी से लेकर बॉलीवूड तक उनके साथ खड़ा है। परंतु अभी भी सरकार का इस विधेयक के प्रति अड़ियल रुख जारी है। सरकार का कहना है कि वह संयुक्त मसौदा समिति की अध्यक्षता किसी गैर सरकारी व्यक्ति को देने और आधिकारिक अधिसूचना जारी करने की मांग स्वीकार नहीं कर सकती।
मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल व कार्यकर्ताओं स्वामी अग्निवेश और
साथ निर्धारित बैठक आज नहीं हो पाई। क्योंकि दोनों पक्षों ने कहा कि वे इस संबंध में एक दूसरे का इंतजार कर रहे हैं। यह बैठक अब शाम छह बजे होगी। सिब्बल ने कहा कि लोकपाल विधेयक पर संयुक्त मसौदा समिति में सिर्फ सरकारी अधिकारी शामिल होगें और कोई भी मंत्री इसका हिस्सा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त समिति के गठन पर आधिकारिक अधिसूचना की कोई संभावना नहीं है लेकिन हमने उन्हें बताया है कि हम कानून मंत्रालय और प्रेस नोट के जरिये एक आधिकारिक पत्र देना चाहते हैं।
Wednesday, April 6, 2011
जारी है भ्रष्टाचार के खिलाफ हजारे की जंग
प्रभात नई दिल्ली, 7 अप्रैलः भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की जंग तीसरे दिन भी जारी है। अन्ना हजारे के आमरण अनशन का आज तीसरा दिन है। उन की इस मांग को देश भर में व्यापक समर्थन मिल रहा है। मोबइल से लेकर इंटरनेट तक विभिन्न माध्यमों से लोग उनके सुर में सुर मिला रहे हैं। लगता है हजारे की यह जंग अब सरकार के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिहं ने कल कैबिनेट के अपने कुछ सहयोगियों के साथ मिलकर हजारे से बातचीत के लिए एक या दो मंत्रियों का समूह भी गठित करने का संकेत दिया है। उधर इस गांधिवादी नेता के विरोध के बाद कृषि मंत्री शरद पंवार ने भ्रष्टाचार पर गठित मंत्रिसमुह से इस्तीफा दे दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि मंगलवार को शुरू हुए इस अनशन को मिल रहे भारी जन समर्थन को देखते हुए इससे निपटने के लिए अनौपचारिक बातचीत का सहारा लिया गया है। हजारे एक प्रतिनिधि के अनुसार सरकार ने अभी तक उनसे काई बातचीत नहीं की है।
सत्य साईबाबा की हालत में सुधार
पुट्टपर्ती, 6 अप्रैल: पीछले दस दिनों से अस्पताल में भर्ती श्री सत्य साईबाबा की हालत में सुधार नजर आया है। परंतु उन्हें जीवनरक्षक प्रणाली पर रखा गया है। श्री सत्य साई इंस्टीट्यूट ऑफ हायर मेडिकल साइंसेज के निदेशक ए एन सैफया का कहना है कि श्री सत्य साईबाबा की हालत स्थिर है। उनके गुर्दे की कार्यप्रणाली में सुधार नजर आया है। लेकिन वह अभी भी डाइलेसिज पर है।
बाबा को फेफड़े और सीने में हुई तकलीफ की शिकायत के बाद 28 मार्च को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। अस्पताल के द्वारा आज सुबह जारी किए गए बुलेटिन में कहा गया कि श्वसन प्रणाली में मदद के लिए उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। रक्तचाप और अन्य स्वास्थ्य मानक संतोषजनक हैं। उनका इलाज कर रही डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य पर नजर रखे हुए है।
Tuesday, March 29, 2011
बढीं हैं उपसंपादक की जिम्मेदारियां-डॉ. जोगेंद्र सिहं
सिरसा,30 मार्च। तकनीक और प्रोद्यौगिकी के विकास ने मीडिया को अत्याधिक प्रभावशाली और उन्नत बनाया है। आज समाचार पत्र उद्योग में हर कार्य कम्प्यूटर की मदद से हो रहा है। समाचार पत्र उद्योग को कंप्यूटर के कारण बहुत लाभ पहुंचा है। परंतु इसके कारण उपसंपादक का कार्य बहुत बढ़ गया है। अब एक उपसंपादक को लेखन, संपादन, पृष्ठांकन और प्रूफरीडिंग सभी प्रकार की भूमिकाएं निभानी पड़ती है। दैनिक ट्रिब्यून के वरिष्ठ उपसंपादक डॉ. जोगेंद्र सिहं ने विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान ये उदगार व्यक्त किए। वे चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से प्रिंट व साइबर मीडिया कार्यशाला के दौरान रूबरू हुए। डॉ. सिहं ने उपसंपादन में करीयर और एक उपसंपादक के कार्यों पर प्रशिक्षु पत्रकारों से खुलकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि उपसंपादक किसी भी समाचार पत्र की रीढ़ होता है। खबरों को तराशने और संवारने की जिम्मेदारी इसी की होती है। यही समाचार पत्र की आवश्यकता के अनुसार समाचारो का चयन और उनके स्थान निर्धारण की जिम्मेदारी भी निभाता है। डॉ. सिहं ने समाचार पत्र की डेस्क की कार्यप्रणाली में आये बदलावों पर भी विद्यार्थियों से अपने अनुभव सांझा किए। उन्होंने कहा कि आजकल अधिकांश समाचार पत्रों में डेस्क का सारा कार्य कम्प्यूटर पर ही होता है। इसलिए इसमें रोजगार पाने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों को कंप्यूटर की सामान्य जानकारी और टाइपिंग में निपुणता परमावश्यक है।डॉ. जोगेंद्र सिहं ने कहा कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं है, यदि आप में लगन है और आप उद्योग की आवश्यकता के अनुसार कार्य करने की क्षमता रखते हैं, तो अपकी सफलता सुनिश्चित है। उन्होंने कहा कि पत्रकार को समाचारों की एबीसी यानि परिशुद्धता,संक्षिप्तता और सत्यता व स्पष्टता का ज्ञान होना आवश्यक है।
डॉ. सिहं ने इस दौरान प्रशिक्षु पत्रकारों के उपसंपादन और पत्रकारिता से जुड़े अनेक सवालो के जवाब भी दिए। रोजगार के अवसरो संबंधी एक सवाल के जवाब में वे बोले कि कुशल और दक्ष लोगों के लिए अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने फीचर संपादक की समाचार पत्रों में बढ़ती मांग के संबंध में भी विद्यार्थियों की जानकारी दी।
कार्यशाला के संचालक और विभागाध्यक्ष वीरेंद्र सिहं चौहान ने भी विद्यार्थियों को उपसंपादन के कार्यों की बारीकियों से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि उपसंपादक को खबरों की समझ होनी चाहिए। उसे अपनी रचनात्मकता के द्वारा खबरों में जान डालनी आनी चाहिए। इस अवसर पर शिक्षकगण सन्नी गुप्ता, कृष्ण कुमार, राममेहर पालवा व डॉ. ब्रह्मलता भी उपस्थित थे।
डॉ. सिहं ने इस दौरान प्रशिक्षु पत्रकारों के उपसंपादन और पत्रकारिता से जुड़े अनेक सवालो के जवाब भी दिए। रोजगार के अवसरो संबंधी एक सवाल के जवाब में वे बोले कि कुशल और दक्ष लोगों के लिए अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने फीचर संपादक की समाचार पत्रों में बढ़ती मांग के संबंध में भी विद्यार्थियों की जानकारी दी।
कार्यशाला के संचालक और विभागाध्यक्ष वीरेंद्र सिहं चौहान ने भी विद्यार्थियों को उपसंपादन के कार्यों की बारीकियों से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि उपसंपादक को खबरों की समझ होनी चाहिए। उसे अपनी रचनात्मकता के द्वारा खबरों में जान डालनी आनी चाहिए। इस अवसर पर शिक्षकगण सन्नी गुप्ता, कृष्ण कुमार, राममेहर पालवा व डॉ. ब्रह्मलता भी उपस्थित थे।
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