सभी देश वासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

Friday, March 18, 2011

भाषा पर बनाएं मजबूत पकड़- गुलशन वर्मा

सिरसा, 17 मार्च। लेखन पत्रकारिता की आधारभूत आवश्यकता है।और इसके लिए आपकी भाषा पर मजबूत पकड़ होनी चाहिए।जब तक हम अपनी लेखन क्षमता को नहीं तराशेंगें,तब तक मीडिया में बेहतर रोजगार प्रांप्त नहीं हो सकता। यह कहना है दैनिक जागरण के स्थानीय संपादक गुलशन वर्मा का। वे चौधरी देवीलााल विश्वविद्यालय में चल रही पिं्रट व साइबर मीडिया कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों से विडियो कांफ्रेंस के माध्यम से रूबरू हुए।
पत्रकारिता एवं जनसंचार के विद्यार्थियों से अपनी बातचीत के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी भाषायी अशुद्धियों को दूर करने की सलाह दी। और इसके लिए नियमित अभ्यास की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी में ऐसे अनेक शब्द हैं, जिन्हें पढ़े लिखे लोग भी सही नहीं लिख पाते। इससे पहले विभागाध्यक्ष और कार्यशाला के संचालक, वीरेंद्र सिहं चौहान ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में विद्यार्थियों से कहा, कि वे अपने आप को उद्योग की आवश्यकता के अनुसार ढालने का हर संभव प्रयास करें। तथा अपनी लेखन क्षमता को तराशें।उन्हांेने कहा कि यदि आप में काबिलीयत है तो मीडिया में आपके लिए अवसर ही अवसर है। बस जरूरत है तो अपनी प्रतिभा को निखारने की।
वेब कांफ्रेंसिंग के दौरान गुलशन वर्मा ने जहां विद्यार्थियों के साथ अपने अनूभव सांझा किए वहीं उनके सवालों के जवाब भी दिए। प्रिंट मीडिया के क्षैत्र में संभावनाओं के संबंध बताते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षैत्र तेजी से विकास कर रहा है,इसलिए इसमें कैरियर के दृष्टिकोण से अपार संभावनाए हैं। एक विद्यार्थी द्वारा पिं्रट मीडिया में मिलने वाले वेतन के संबंध में उन्होंने कहा कि आज अधिकांश समचार पत्र अपने कर्मचारियों को काफी अच्छा वेतन दे रहें हैं। वे बोले कह आज लगभग 10 हजार रूपये तक शुरूआती वेतन मिलता है, जबकी उन्होंने मात्र 1500 रूपये से अपने पत्रकारिता करीयर की शुरूआत की थी।
वर्मा ने कहा कि आज समाचार पत्र की पहुंच हर घर तक हो गई है। और लोकल पुलआउट निकलने लगे यही कारण है कि यह उद्योग फलफूल रहा है।उन्होंने का कि इसमें रोजगार पाने के लिए आपको हिंदी अंग्रेजी का ज्ञान, सामान्य ज्ञान,आत्मविश्वास तथा शब्दों से खेलने की कला विकसित करनी पड़ेगी। कार्यशाला में प्रतिभागियों के साथ प्राध्यापिका पूनम कालेरा तथा प्राध्यापक कृष्ण कुमार, सन्नी गुप्ता तथा सुरेंद्र कुमार भी उपस्थित थे।

Wednesday, March 16, 2011

ब्लॉगिंग में करीयर पर कार्यशाला

सिरसा, 16 मार्च। ब्लॉगिंग का शौक आपकी कमाई का बेहतर साधन बन सकता है। अपने इसी शोक की बदोलत कई लोग लाखों कमा रहे हं। यदि आपको यह शोक है तो आप भी डॉलर में कमाई कर सकते हैं। बस जरुरत है धैर्य और सही रणनीति की। यह कहना है सिरसा के ब्लॉगर और वायु सेना से सेवानिवृत सुनील नेहरा का। वे चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार के विद्यार्थियों से प्रिंट व साइबर मीडिया कार्यशाला के दौरान रुबरु हुए। उन्होंने कहा कि इंटरनेट के आने से रोजगार के अनेक अवसर पैदा हुए है। ब्लॉगिंग भी उन्हीं में से एक है।

सुनील नेहरा ने कहा कि जब बैंग्लोर में 1996 में पहला साइबर कैफे खुला तभी से उन्हें कम्प्युटर में रुचि है। इसलिए वह ब्लॉगिंग की तरफ आकर्षित हुए। भारत में ब्लॉगिंग की शुरुआत के संबंध में उन्होंने बताया कि 1996 से इसकी शुरुआत हुई। परंतु 2004 के बाद इसमें तेजी देखने का मिली। उन्होंने बताया कि अमित अग्रवाल को भारत में ब्लॉगिंग का पिता माना जाता है। लेबनॉन डॉट ओ. आर. जी. नामक ब्लॉग का संचालन कर रहा यह शख्स आज 20 लाख रुपये प्रति महिने से भी अधिक कमा रहा है।इसी प्रकार उन्होंने अमित भवानी,हर्ष अग्रवाल,जसपाल सिहं,निर्मल तथा रोहित लंगाड़े जैसे भारतीय ब्लॉगर के संबंध में भी बताया जो ब्लोगिंग के माध्यम से आज लाखों कमा रहें हैं ।

नेहरा ने कमाई के संबंध में बताया कि इसमें पैसा आपके ब्लॉग की विषय वस्तु और विजिटर पर निर्भर करता है। जितने अधिक आपके विजिटर होंगे उसी आधार पर आपको एड सेंस के विज्ञापन मिलेंगें। आपकी कमाई इन्हीं विज्ञापनों से आती है। विषय वस्तु के चुनाव के संबंध में वे बोले कि विषय आपकी रुचि का होना चाहिए। क्योंकि उस पर आप बेहतर लिख पाऐंगे। उन्होंने कहा कि ब्लॉगिंग से कमाई का कोई शॉर्टकट नहीं है। इसके लिए आपको लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

विभागाध्यक्ष तथा कार्यशाला के संचालक वीरेंद्र सिहं चौहान ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने ब्लॉग पर नियमित रुप से कुछ न कुछ लिखें।तथा जो सुविधाएं उन्हें प्रदान की गई हैं, उनका सदुपयोग कर अपनी प्रतिीभा को निखारने का प्रयास करें।इस अवसर पर प्राध्यापिका पूनम कालेरा तथा प्राध्यापक कृष्ण कुमार, सन्नी गुप्ता , सुरेंद्र कुमार, विकास सहारण तथा राममेहर भी उपस्थित थे।

Monday, March 14, 2011

विद्यार्थियों ने सीखे प्रेस कांफ्रेंस के गुर

सिरसा , 14 मार्च। भारतीय पत्रकारिता ने विकास के अनेक आयाम स्थापित किए हैं। परंतु प्रेस वार्ता के वास्तविक अर्थ से हम अभी भी अनभिज्ञ हैं। 90 फीसदी से अधिक पत्रकार प्रेस वार्ता के दौरान प्रश्न ही नहीं पूछते।यह पत्रकारों के लिए चिंता का विषय है, भावी पत्रकारों को चाहिए कि वे इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए इसे दूर करने का प्रयास करें। यह कहना है चौ। देवीलाल विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष वीरेंद्र सिहं चौहान का।

वे यहां अपने विभाग के प्रशिक्षु पत्रकारों को प्रिंट व साइबर मीडिया कार्यशाला के दौरान सम्बोधित कर रहे थे। उन्होने कहा कि प्रश्न पूछना पत्रकार का जन्मसिद्ध अधिकार है, परंतु प्रश्न स्पष्ट तथा संक्षिप्त होने चाहिए। आयोजकों के साथ किसी भी प्रकार की बहस से बचना चाहिए। कड़़वी से कड़वी बात भी शालीनता के साथ पूछनी चाहिए। यदि जवाब न भी मिले तो जिद्द नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकार को शोध के बाद ही प्रेस वार्ता में जाना चाहिए, ताकि सटीक तथा विषय के अनुरूप प्रश्न पूछे जा सके। हमें बिना किसी पूर्वाग्रह के निश्पक्षता से प्रश्न पूछने चाहिए।

विद्यार्थियों में सवाल पूछने की कला विकसित करने के लिए एक मोक प्रेस वार्ता का आयोजन भी किया गया। इसमें कार्यशाला के संचालक वीरेंद्र सिहं चौहान ने विद्यार्थियों के सवालों के जवाब दिए। एक विद्यार्थी द्वारा भ्रष्टाचार समाप्त करने में मीडिया की भूमिका पर उन्होंने कहा, कि मीडिया का काम केवल सच्चाई को उजागर करना है। शेष कार्य न्याय पालिका तथा कार्यपालिका का है। पत्रकारों द्वारा की जाने वाली लॉबिंग के संबंध में वे बोले कि यह सब कार्य केवल अप्रिशिक्षित पत्रकारों द्वारा ही किया जाता है। मझे हुए पत्रकार ऐसा नहीं करते।

कार्यशाला संचालक ने एडिटर गिल्ड तथा प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया के संबंध में भी विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ-साथ ब्लॉग डिजाइनिंग की सामान्य जानकारी भी विद्यार्थियों को दी गई। सुबह के सत्र में पेज डिजायनर अनिल कक्कड़ ने पृष्ठांकन की व्यवहारिक जानकारी से विद्यार्थियों को अवगत करवाया। इस अवसर पर प्राध्यापिका पूनम कालेरा तथा प्राध्यापक कृष्ण कुमार, सन्नी गुप्ता , सुरेंद्र कुमार, विकास सहारण तथा राममेहर भी उपस्थित थे।

Sunday, March 13, 2011

विद्यार्थियों ने जानी अंग्रेजी की महत्ता

सिरसा,13 मार्च। प्रतियोगिता के इस दौर में अंग्रेजी का ज्ञान बहुत जरुरी है। मीडिया के क्षेत्र में कामयाबी पाने के लिए अंग्रेजी पर पकड़ होनी आवश्यक है। इसका जितना डर हमारे अंदर बैठा हुआ है,वास्तव में यह उतनी मुश्किल नहीं है। यदि हम प्रयास करें तो इस पर अधिकार प्राप्त किया जा सकता है। यह कहना है अमेरिकन संस्थान के संचालक और हिंदुस्तान टाइम्स के संवाददाता सतपाल सिहं का। वे चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय में प्रिंट व साइबर मीडिया कार्यशाला के आठवें दिन विद्यार्थियों से रुबरु हुए।
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों को अंग्रेजी का महत्व बताते हुए वे बोले कि यदि आप को हिंदी के साथ इस भाषा की भी जानकारी है, तो आप मीडिया उद्योग में अच्छी कमाई कर सकतें हैं। वे बोले कि हम दैनिक जीवन में अंग्रजी के सैंकड़ों शब्दों का प्रयोग करतें हैं। परंतु अभ्यास की कमी के कारण अंग्रेजी नहीं बोल पाते। अभ्यास के लिए माहौल हमें स्वयं तैयार करना होगा। हमें अपने दोस्तों के साथ अंग्रेजी बोलने की शुरुआत करनी होगी। शुरुआत में हमें फिलर का प्रयोग करना चाहिए इनसे हमें सोचकर बोलने का मौका मिल जाता है।
कार्यशाला के संचालक और विभागाध्यक्ष वीरेंद्र सिहं चौहान ने कहा कि अंग्रेजी के बिना एक पत्रकार का काम नहीं चल सकता। इसलिए जो विद्यार्थी मीडिया में करियर बनाना बाहतें है उन्हें अंग्रेजी का सामान्य ज्ञान होना आवश्यक है। सतपाल सिहं ने कहा कि हमें जब भी अंग्रेजी का कोई नया शब्द दिखे उसे नोट कर लेना चाहिए। इसके बाद शब्दकोष के माध्यम से उस शब्द का अर्थ तथा उच्चारण जानने की कोशीश करें। इससे हमारी अंग्रेजी की शब्दावली मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि हमें पढ़ने कि भी आदत डालनी चाहिए तथा सप्ताह में कम से कम एक अंग्रेजी फिल्म अवश्य देखनी चाहिए।
अंग्रेजी ट्रेनर ने विद्यार्थियों के अनेक सवालों के जवाब भी दिए। अंग्रेजी सीखाने वाले संस्थानों से जुड़े एक सवाल के जवाब में वे बोले कि संस्थान केवल रास्ता दिखा सकतें हैं। जब तक हम स्वयं प्रयास नहीं करेंगें, अंग्रेजी नहीं सीखी जा सकती। आत्म विश्वास संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि आत्म विश्वास ज्ञान से आता है। इसलिए हमें अधिक से अधिक सीखने की कोशीश करनी चाहिए। इस अवसर पर प्राध्यापिका पूनम कालेरा तथा प्राध्यापक कृष्ण कुमार, सन्नी गुप्ता, सुरेंद्र कुमार, विकास सहारण तथा राममेहर भी उपस्थित थे।

Friday, March 11, 2011

आसमां तेरे कदमों में होगा

पंख फैलाकर उडने को
इस धरा पर छाने को।
क्या तेरा दिल नहीं करता ?
हर जुबां पर छाने को
हर दिल में बस जाने को।
क्या तेरा मन नहीं करता ?
अब उठ, खड़ा हो, पहचान स्वयं को।
क्षितिज तेरा इंतजार कर रहा।
भूलकर अपनी ताकत को,
तंु क्यों चुनौतियों से डर रहा।
बस करले ये प्रण आज से
लड़ना है हर रण आज से।
रास्ते के कांटों से आंधी और तुफानों से,
जरा भी मत घबराना तुम।
लक्ष्य न ओझल होने देना,
हर हाल में चलते रहना।
खुद पर यकीं, मंजिल से प्रेम,
और दृढ़ निश्चय होगा
ये प्रभात का वादा है
आसमां तेरे कदमों में होगा.
आसमां तेरे..........................

सफलता के लिए जरुरी है संवेदनशीलता-औमप्रकाश


सिरसा,13 मार्च। जीवन में सफलता के लिए जरुरी है कि हम अपने आप से प्रेम करें। हमें अपनी कमियों की बजाय अपनी ताकत को पहचानना चाहिए। परंतु होता इसके विपरीत है, उदाहरणतयः हम जब भी सीसा देखते हैं तो अपनी कमियां ढूंढ़ते हैं। और यहीं पर हम कमजोर हो जाते हैं, हमें जीवन के प्रति अपने नजरिये को बदलना होगा। अपने लक्ष्य से प्रेम करना सिखना होगा उससे संवेदना रखनी होगी। तभी हम बिना थके अपने लक्ष्य को पा सकेंगें। ये उद्गार त्रिवेणी शिक्षण संस्थान के सचिव औमप्रकाश ने विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान व्यक्त किए।वे चौधरी देवीलााल विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में प्रिंट व साइबर मीडिया कार्यशाला में विद्यार्थियों से मुखातिब हुए।
कार्यशाला के चौथे दिन विद्यार्थियों नें व्यक्तित्व विकास के गुर सीखे।औमप्रकाश ने प्रशिक्षु पत्रकारों के व्यक्तित्व विकास से जुड़े अनेक सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में विरोधाभाष जरुरी है, नकारात्मकता के बिना सकारात्मकता का अस्तित्व नहीं है,असफलता हि सफलता की पहली सीढ़ी है। डेयर टू फेल पुस्तक का जिक्र करते हुए वे बोले कि हमारे में असफलता को सहन करने की ताकत होनी चाहिए तभी हम सफलता के स्वाद को चख पाएंगें। पतंजली के आठ सूत्रों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हमें केवल यह ध्यान रखना चाहिए कि हमें क्या करना है। तब हमारे कदम अपने आप मंजिल की तरफ बढ़ जाएंगे। और हमें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में काई नहीं रोक पाएगा।
एक विद्यार्थि द्वारा आत्मविश्वास बढ़ाने से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इसके लिए सबसे पहले तो हमें अपनी ताकत को पहचानना होगा।पूरे दिन में कम से कम आधा घंटा अपने लिए अवश्य निकाले जिसमें कुछ योगा तथा ध्यान की क्रियाएं करें। पुस्तकें के महत्व पर वे बाले कि ये हमारी ज्ञान पीपासा को शांत करने में महत्वपूर्ण भुमिका निभाती हैं। विभागाध्यक्ष वीरेंद्र सिहं चौहान ने कार्यशाला का संचालन किया तथा विद्यार्थियों से कहा कि वे इसका भरपूर लाभ उठाते हुए आने वाली चूनौतियों के लिए अपने आप को तैयार करें। इस अवसर पर प्राध्यापिका पूनम कालेरा तथा प्राध्यापक कृष्ण कुमार, विकास सहारण, सुरेंद्र कुमार, सन्नी गुप्ता व राममेहर भी उपस्थित थे।

Thursday, March 10, 2011

आम बोलचाल की भाषा अपनाएं मीडिया- औमकार चौधरी

सिरसा,11 मार्च: समाचार पत्र की सफलता उसके पाठकों पर निर्भर करती है और पाठकों को वही समाचार पत्र आकर्षित करता है जिसकी भाषा आम बोलचाल वाली हो, गूढ़ साहित्यिक भाषा का प्रयोग करने वाला समाचार पत्र अधिक समय तक लोकप्रियता हासिल नहीं कर सकता। इसलिए पत्रकार और समाचार पत्र को सरल भाषा का प्रयोग करना चाहिए। यह बात हरी भूमि समाचार पत्र के स्थानीय संपादक औमकार चौधरी ने चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में 15 दिवसीय प्रिंट व साइबर मीडिया पर आधारित कार्यशाला के दौरान पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों को वेब कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए कही।
वेब कांफ्रेंसिंग के दौरान उन्होंने जहां विद्यार्थियों के साथ अपने अनूभव सांझा किए वहीं उनके सवालों के जवाब भी दिए। प्रिंट मीडिया के क्षैत्र में संभावनाओं के संबंध बताते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षैत्र तेजी से विकास कर रहा है,इसलिए इसमें कैरियर के दृष्टिकोण से अपार संभावनाए हैं। एक विद्यार्थी द्वारा प्रिंट मीडिया में मिलने वाले वेतन के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह समाचार पत्र के आकार और प्रकार पर निर्भर करता है। अंग्रेजी के समाचार पत्रों में प्रत्येक स्तर पर अपेक्षाकृत अच्छा वेतन मिलता है, हाल हि के वर्षों में वेतनमानों में सुधार हुआ है परंतु छोटे पत्रकारों की हालत अभी भी बहुत खराब है।
विद्यार्थियों को लेखन कला का कौशल विकसित करने के लिए उन्होंने ब्लॉग लिखने की सलाह दी और कहा कि यह कार्य उन्हें अपने प्रद्यापकों की देखरेख में करना चाहिए। एक विद्यार्थी ने नीरा राडिया टेप का जिक्र करते हुए जब पत्रकारों की साख में आई गिरावट संबंधी सवाल पूछा तो वे बोले कि पत्रकारों को कई बार अपने सूत्रों को बनाए रखने के लिए विवादस्पद स्थितियों का सामना करना पड़ता है परंतु ऐसा हमेशा नहीं होता। सांप्रदायिकता भड़काने में मीडिया की भूमिका पर उन्होंने कहा कि अयोध्या कांड के दौरान कुछ समाचार पत्रों ने सांप्रदायिकता को हवा दी थी परंतु अधिकांश ने उस दौरान भी अच्छी पत्रकारिता का परिचय दिया। ऐसी स्थिति में पत्रकार को सोच समझकर काम करना चाहिए। पत्रकारिता और लेखन के संबंध में वे बोले कि एक पत्रकार को लेखन की सामान्य जानकारी होनी आवश्यक है, एक अच्छा लेखक हि अच्छा पत्रकार हो सकता है।
खोजी पत्रकार के संबंध में उन्होंनें कहा कि उसमें जोखिम उठाने का जज्बा, पर्याप्त धैर्य तथा आत्मविश्वास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मीडिया संस्थानों को विद्यार्थियों के व्यवहारिक प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन पर ध्यान देना चाहिए तथा मीडिया के अनुभवी प्रद्यापकों की नियुक्ति करनी चाहिए या समय-समय पर उन्हें मीडिया उद्योग में प्रशिक्षण लेना चाहिए। अंत में विभागाध्यक्ष विरेंद्र सिहं चौहान ने वरिष्ठ पत्रकार औमकार चौधरी का धन्यवाद करते हुए विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे विशेषज्ञ द्वारा बताई गई बातों पर गौर करें तथा उनके अनुभवों से सीखनें की कोशीश करें। इस अवसर पर कार्यशाला के समन्वयक प्रद्यापक कृष्ण कुमार, सन्नी गुप्ता, सुरेंद्र कुमार, विकास सहारण, राममेहर तथा प्राद्यापिका पूनम कालेरा भी उपस्थित थे।